योग और ध्यान

ध्यान’ और योग से शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक लाभ

‘ध्यान’ चेतन मन की एक प्रक्रिया है जिसमें साधक अपनी चेतना बाह्य जगत के किसी चुने हुए दायरे या स्थल विशेष पर केन्द्रित करता है। इसे अंग्रेजी में ‘अटेंशन’ कहते हैं। योग सम्मत ध्यान और सामान्य ध्यान में अंतर है। योग सम्मत ध्यान लम्बे समय के अभ्यास के परिणाम स्वरूप आध्यात्मिक लक्ष्य की ओर ले जाता है और सामान्य ध्यान भौतिक शक्ति की वृद्धि करता है। लोग सदियों से ध्यान-अभ्यास को अपने जीवन में ढालते रहे हैं। आज जबकि लोगों को इसके नये और विविध लाभ पता चलते जा रहे हैं, तो इसकी प्रसिद्धि में भी बढ़ोतरी हो रही है। यह तो सिद्ध हो चुका है कि ध्यान-अभ्यास हमारे शरीर, मन और आत्मा दोनों को लाभ पहुंचाता है। परंतु आज लोग इसके एक अतिरिक्त लाभ के बारे में जान रहे हैं- अपने अंदर नवीन ऊर्जा जागृत करने से अवर्णनीय लाभ मिलता है।डॉक्टर हमें बताते हैं कि तनाव हमारे शारीरिक स्वास्थ्य पर बहुत हानिकारक प्रभाव डालता है। ध्यान करने से हमारा शरीर पूरी तरह से शांत हो जाता है और हमारा समस्त तनाव दूर हो जाता है। परीक्षण बताते हैं कि यान-अभ्यास के दौरान हमारी दिमागी तरंगें धीमी होकर 4-10 हटर्‌ज़ पर कार्य करने लगती हैं, जिससे कि हमें पूरी तरह से शांत होने का एहसास होता है। इससे शरीर को अनेक लाभ मिलते हैं, जैसे कि बेहतर नींद आना, रक्तचाप में कमी आना, रोग-प्रतिरोधक क्षमता और पाचन प्रणाली में सुधार आना, तथा दर्द के एहसास में कमी आना।

ज्योति ध्यान-अभ्यास करने से ये सभी लाभ हमें अपने आप ही प्राप्त हो जाते हैं।दिन भर में हमारे मन में विचार चलते रहते हैं। जब हम ध्यान-अभ्यास करने के लिये बैठते हैं और अपने ध्यान को आत्मा या कहीं पर एकाग्र होने की क्षमता में इस बढ़ोतरी से, तथा साथ ही तनाव में कमी, ऊर्जा में वृद्धि, और रिश्तों में सुधार आने से हम सांसारिक कार्यों में भी सफलता प्राप्त करते हैं। हम पहले से अधिक कार्यकुशल और उत्पादक हो जाते हैं।ज्योति ध्यान-अभ्यास और शब्द-अभ्यास अनूठी विधाएं हैं। ये शरीर और मन को ही नहीं बल्कि आत्मा को भी लाभ पहुंचाती हैं। अपने भीतर के शक्तिशाली प्रकाश और ध्वनि के साथ जुड़ने से हमारी आत्मा बलवान होती है और हम अधिक चेतनता से भरपूर मंडलों में पहुंच जाते हैं। ये ताकतवर आत्मा ही हमारा वास्तविक स्वरूप है तथा ये अपार ज्ञान, प्रेम और शक्ति का स्रोत है। ये एक पूरी तरह से आध्यात्मिक अनुभव है। अपने ध्यान को अपने भीतर एकाग्र करने से ही आंतरिक रूहानी मंडलों का अनुभव कर सकते हैं और इस प्रकार अपने जीवन के असली उद्‌देश्य को पूरा कर सकते हैं।नियमित रूप से ध्यान करने से हम प्रत्येक जीव में प्रभु का अंश देखने लगते हैं। इस महान्‌ सत्य का अनुभव करने से हमारे जीवन में बहुत बड़ा परिवर्तन आता है। हम सभी लोगों से एक समान प्रेम करने लगते हैं और उन्हें अपने ही परिवार का सदस्य समझने लगते हैं।

हमारे अंदर बहुत बड़ी तब्दीली (परिवर्तन) आती है तथा हम सभी प्रेम और करुणा का व्यवहार करने लगते हैं। अगर प्रत्येक व्यक्ति ध्यान-अभ्यास के द्वारा अंदरूनी शांति प्राप्त कर ले और सभी से प्रेम का व्यवहार करने लगे, तो शीघ्र ही संपूर्ण विश्व में शांति स्थापित हो जायेगी। हम प्रेम और एकता से एक दूसरे के साथ रहने लगेंगे।गहरी सांस और लम्बी अवधि तक शांत रहने का सम्बन्ध ‘भारतीय योग’ या किसी आश्रम से हो सकता है, सामाजिक तैयारी से तो एकदम नहीं लेकिन अमेरिकी सेना के उच्च अधिकारी इस बात पर अध्ययन कर रहे हैं कि ध्यान/मेडिटेशन, युद्ध के दौरान उनके सैनिकों के मानसिक प्रदर्शन को सुधारने के साथ-साथ इनके सम्पूर्ण स्वास्थ्य सुधार में सहायक सिद्ध हो सकता है। आर.आई.ए. नो बोस्ती के अनुसार अमेरिकी मरीन स्टाफ सार्जेन्ट नाथन हैपटन ने ‘द वाशिंगटन टाइम्स’ से कहा ‘ढेर सारे लोग सोचते हैं कि ‘ध्यान’ से समय की बर्बादी होती है लेकिन मैंने ‘माइंड फिटनेस’ ट्रेनिंग की प्रभावकता पर एक सैन्य अध्ययन में भाग लिया तो मैंने अपने आपको बेहतर महसूस किया कि मैं पूरे समय तनावमुक्त था। ‘ध्यान’ आपको तनावपूर्ण स्थिति में अधिक स्पष्ट रूप से सोचने में मदद करता है। जिस कार्यक्रम में मैंने हिस्सा लिया था, वह कार्यक्रम अमेरिकी सेना के एक पूर्व कप्तान और मौजूदा समय में जार्ज टाउन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ऐलिडबिथ स्टेनली ने तैयार किया था।‘ध्यान साधना’ और योग से शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक तथा वैश्विक लाभ मिलता है जिससे विश्व की एकता मजबूत होती है। भारत ‘वसुधैव कुटुम्बकम्‌’ की भावना का समर्थक रहा है। इसलिए पूरे विश्व में हम ऋषि परम्परा का प्रचार-प्रसार कर लोगों के शारीरिक तथा मानसिक तकलीफों को दूर करने का प्रयास कर रहे हैं।

ध्यान क्या है?

ध्यान एक विश्राम है। यह किसी वस्तु पर अपने विचारों का केन्द्रीकरण या एकाग्रता नहीं है, अपितु यह अपने आप में विश्राम पाने की प्रक्रिया है। ध्यान करने से हम अपने किसी भी कार्य को एकाग्रता पूर्ण सकते हैं।

ध्यान के ५ लाभ

  1. शांत चित्त
  2. अच्छी एकाग्रता
  3. बेहतर स्पष्टता
  4. बेहतर संवाद
  5. मस्तिष्क एवं शरीर का कायाकल्प व विश्रामरीर का कायाकल्प व विश्राम

ध्यान के 5 स्वास्थ्य लाभ

ध्यान के कारण शरीर की आतंरिक क्रियाओं में विशेष परिवर्तन होते हैं और शरीर की प्रत्येक कोशिका प्राणतत्व (ऊर्जा) से भर जाती है। शरीर में प्राणतत्व के बढ़ने से प्रसन्नता, शांति और उत्साह का संचार भी बढ़ जाता है।

ध्यान से शारीरिक स्तर पर होने वाले लाभ

  1. उच्च रक्तचाप का कम होना, रक्त में लैक्टेट का कम होना, उद्वेग/व्याकुलता का कम होना।
  2. तनाव से सम्बंधित शरीर में कम दर्द होता है। तनाव जनित सिरदर्द, घाव, अनिद्रा, मांशपेशियों एवं जोड़ों के दर्द से राहत मिलती है।
  3. भावदशा व व्यवहार बेहतर करने वाले सेरोटोनिन हार्मोन का अधिक उत्पादन होता है।
  4. प्रतिरक्षा तंत्र में सुधार आता है।
  5. ऊर्जा के आतंरिक स्रोत में उन्नति के कारण ऊर्जा-स्तर में वृद्धि होती है।

ध्यान के 11 मानसिक लाभ

ध्यान, मस्तिष्क की तरंगों के स्वरुप को अल्फा स्तर पर ले आता है जिससे चिकित्सा की गति बढ़ जाती है। मस्तिष्क पहले से अधिक सुन्दर, नवीन और कोमल हो जाता है। ध्यान मस्तिष्क के आतंरिक रूप को स्वच्छ व पोषण प्रदान करता है। जब भी आप व्यग्र, अस्थिर और भावनात्मक रूप से परेशान होते हैं तब ध्यान आपको शांत करता है। ध्यान के सतत अभ्यास से होने वाले लाभ निम्नलिखित हैं:

ध्यान से शारीरिक स्तर पर होने वाले लाभ

  1. व्यग्रता का कम होना
  2. भावनात्मक स्थिरता में सुधार
  3. रचनात्मकता में वृद्धि
  4. प्रसन्नता में संवृद्धि
  5. सहज बोध का विकसित होना
  6. मानसिक शांति एवं स्पष्टता
  7. परेशानियों का छोटा होना
  8. ध्यान मस्तिष्क को केन्द्रित करते हुए कुशाग्र बनाता है तथा विश्राम प्रदान करते हुए विस्तारित करता है।
  9. बिना विस्तारित हुए एक कुशाग्र बुद्धि क्रोध, तनाव व निराशा का कारण बनती है।
  10. एक विस्तारित चेतना बिना कुशाग्रता के अकर्मण्य/ अविकसित अवस्था की ओर बढ़ती है। कुशाग्र बुद्धि व विस्तारित चेतना का समन्वय पूर्णता लाता है।
  11. ध्यान आपको जागृत करता है कि आपकी आतंरिक मनोवृत्ति ही प्रसन्नता का निर्धारण करती है।

ध्यान के 3 आध्यात्मिक लाभ

ध्यान का कोई धर्म नहीं है और किसी भी विचारधारा को मानने वाले इसका अभ्यास कर सकते हैं।

मैं कुछ हूँ इस भाव को अनंत में प्रयास रहित तरीके से समाहित कर देना और स्वयं को अनंत ब्रह्मांड का अविभाज्य पात्र समझना।
ध्यान की अवस्था में आप प्रसन्नता, शांति व अनंत के विस्तार में होते हैं और यही गुण पर्यावरण को प्रदान करते हैं, इस प्रकार आप सृष्टी से सामंजस्य में स्थापित हो जाते हैं।
ध्यान आप में सत्यतापूर्वक वैयक्तिक परिवर्तन ला सकता है। क्रमशः आप अपने बारे में जितना ज्यादा जानते जायेंगे, प्राकृतिक रूप से आप स्वयं को ज्यादा खोज पाएंगे।
ध्यान के लाभ कैसे प्राप्त करें | ध्यान के लाभों को महसूस करने के लिए नियमित अभ्यास आवश्यक है। प्रतिदिन यह कुछ ही समय लेता है। प्रतिदिन की दिनचर्या में एक बार आत्मसात कर लेने पर ध्यान दिन का सर्वश्रेष्ठ अंश बन जाता है। ध्यान एक बीज की तरह है। जब आप बीज को प्यार से विकसित करते हैं तो वह उतना ही खिलता जाता है.

प्रतिदिन, सभी क्षेत्रों के व्यस्त व्यक्ति आभार पूर्वक अपने कार्यों को रोकते हैं और ध्यान के ताज़गी भरे क्षणों का आनंद लेते हैं। अपनी अनंत गहराइयों में जाएँ और जीवन को समृद्ध बनाए