Vastu Yantra-वास्तु यन्त्र

Yantra which create perfect geometrical three-dimensional energy fields and, when placed properly in the home, help neutralize any negative effects of improper Vastu. It protects from disturbing negative energies in the environment. Yantras give us help in creating harmony with nature rather than working against the forces of nature Yantras are beautiful art, the original Vedic sacred geometry from ancient India. These cosmic diagrams generate beautiful energies that instil splendid divine consciousness into your surroundings. Vastu dosh nivaran Yantras are very powerful tool. These Yantras are very effective in dealing with the harmful effects that arise due to the fault in the architecture of any building. Vastu dosh nivaran Yantras is a tool that helps in achieving prosperity, mental peace, happiness and harmony in place of our home and work by making a balance between all five elements-earth, water, air, fire and space.

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Vastu – वास्तु

वास्तु पिरामिड का महत्व-वास्तु से जुड़े इस उपाय के बारे में शायद ही आपको पता होगा। वास्तु के अनुसार घर में पिरामिड इंस्ट्रूमेंट रखने से बहुत अच्छे लाभ होते हैं। ये देखने में तो बहुत सिंपल सा लगता है लेकिन इसका असर आपके भाग्य को बदलने की ताकत रखता है। कहते हैं कि पिरामिड को घर के अंदर रखने से पॉजिटिविटी आती है और अगर पिरामिड को घर के बीचो-बीच रख दिया जाए तो इसका असर और भी बढ़ जाता है। इसी के साथ ये मानव जीवन को बेहतर बनाने में भी मददगार माना जाता है। इसको घर में रखने से सिर्फ नेगेटिविटी ही नहीं दूर होती है बल्कि प्रॉपर्टी से जुड़े सभी मसले भी हल होने लगते हैं और धीरे-धीरे आपके कदम सफलता की ओर बढ़ते चले जाते हैं। अगर कोई व्यक्ति किसी प्रकार की नई योजनाएं बना रहा हो तो पिरामिड घर में रखने से उसमे हमेशा सक्सेस मिलती है। इतना ही नहीं इससे आपके सभी बिगड़े काम बड़ी आसानी से बन सकते हैं, लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार इसको घर में रखने से पहले सही दिशा का ज्ञात होना बहुत जरूरी है। वास्तु क्रिस्टल का महत्व-कछुए को भगवान विष्‍णु अवतार माना जाता है। धातु का कछुआ घर में रखने या उसका चित्र दीवार पर लगाना शुभ होता है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है व वास्तुदोष भी दूर होता है। सनातन धर्म में कछुए को ‘कूर्म’ अवतार अर्थात कच्छप अवतार कहकर संबोधित किया जाता है। उनके दशावतार में से ‘कूर्म’ अर्थात कछुआ भगवान विष्णु का दूसरा अवतार है। पद्म पुराण के अनुसार, कच्छप के अवतार में भगवान विष्णु ने क्षीरसागर में समुद्र मंथन के समय मंदार पर्वत को अपने कवच पर थामा था।

इस प्रकार भगवान विष्णु के कच्छप अवतार, मंदार पर्वत तथा शेषनाग की सहायता से देवों एंव असुरों ने समुद्र मंथन करके चौदह रत्नों की प्राप्ति की। भगवान विष्‍णु के ‘कूर्म’ अवतार की पूजा-अर्चना भी की जाती है। हिंदू धर्म में कछुए को शुभ माना गया है। घर में धातु का कछुआ रखने से, कई समस्याओं के समाधान में मदद मिलती है। वास्तु के अनुसार कछुए को उत्तर दिशा में रखने से धन लाभ और शत्रुओं का नाश होता है। परिवार के सदस्यों को सुरक्षा भी मिलती है। परिवार के मुखिया की आयु लंबी होती है। यदि आप व्यवसायी हैं, तो अपने प्रतिष्ठान के मुख्यद्वार पर कछुए का चित्र लगाएं। ऐसा करने से व्यापार में धन लाभ और सफलता मिलती है रुके हुए काम जल्दी होने लगते हैं। घर के मुख्यद्वार पर कछुए का चित्र लगाने से परिवार में शांति बनी रहती है। यह क्लेश व नकारात्मक चीजों को घर से दूर करता है। घर की नकारात्मक उर्जा भी दूर होती है। धातु का कछुआ घर में रखने से घर के लोगों का मूड भी अच्छा रहतअक्सर घर का कोई सदस्य लगातार बीमार रहता है और दवा आदि लेने पर भी स्वास्‍थ सुधार नहीं होता। लाख जतन करने के बाद भी यदि कारण समझ नहीं आ रहा हो, तो घर की दक्षिण-पूर्व दिशा में कछुए का चित्र लगाएं। इस दिशा में धातु का कछुआ रखने से घर का वातावरण शुद्ध रहता है। कछुआ नजर दोष खत्म करता है। इससे घर में बीमारियां नहीं आती व घर पर बुरी नजर का असर नहीं होता।

वास्तु यंत्र का महत्व-वास्तु का अर्थ

वास्तु शास्त्र एक विज्ञान है जो हमारे घर और काम के स्थान पर समृद्धि, मानसिक शांति, खुशी और सामंजस्य को प्राप्त करने में मदद करता हैं. वास्तु हमारे चारों ओर उपस्थित विभिन्न ऊर्जा को इस तरीके से कवच के रूप में पिरोता है कि व्यक्ति सदभाव से रहता हैं.

वास्तु दोष निवारण यंत्र

सम्पूर्ण वास्तु दोष निवारण यंत्र विभिन्न उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए विशेष रूप से बनाया गया हैं. इसमें 13 यंत्र होते है – वास्तु दोष निवारण यंत्र, बगलामुखी यंत्र, गायत्री यंत्र, महामृत्युंजय यंत्र, महाकाली यंत्र, वास्तु महायंत्र, केतु यंत्र, राहु यंत्र, शनि यंत्र, मंगल यंत्र, कुबेर यंत्र, श्री यंत्र, गणपति यंत्र |

इन सभी यंत्रों का उपयोग हमारे जीवन में संतुलन और हमारे बाहरी और आंतरिक वास्तु में सामंजस्य बनाए रखता है और इस प्रकार हमारे जीवन में अधिक से अधिक खुशियाँ रहती हैं|

Vastu Pyramid

Vastu Crystal

Vastu Gem Stone

Vastu Energy Plates

Vastu Yantra

Rudraksha-रुद्राक्ष

रुद्राक्ष की खासियत यह है कि इसमें एक अनोखे तरह का स्पदंन होता है। जो आपके लिए ऊर्जा का एक सुरक्षा कवच बना देता है, जिससे बाहरी ऊर्जाएं आपको परेशान नहीं कर पातीं

रुद्राक्ष के फायदे

रुद्राक्ष के संबंध में एक और बात महत्वपूर्ण है। खुले में या जंगलों में रहने वाले साधु-संन्यासी अनजाने सोत्र का पानी नहीं पीते, क्योंकि अक्सर किसी जहरीली गैस या और किसी वजह से वह पानी जहरीला भी हो सकता है। रुद्राक्ष की मदद से यह जाना जा सकता है कि वह पानी पीने लायक है या नहीं। रुद्राक्ष को पानी के ऊपर पकड़ कर रखने से अगर वह खुद-ब-खुद घड़ी की दिशा में घूमने लगे, तो इसका मतलब है कि वह पानी पीने लायक है। अगर पानी जहरीला या हानि पहुंचाने वाला होगा तो रुद्राक्ष घड़ी की दिशा से उलटा घूमेगा। इतिहास के एक खास दौर में, देश के उत्तरी क्षेत्र में, एक बेहद बचकानी होड़ चली। वैदिककाल में सिर्फ एक ही भगवान को पूजा जाता था – रुद्र यानी शिव को। समय के साथ-साथ वैष्णव भी आए। अब इन दोनों में द्वेष भाव इतना बढ़ा कि वैष्णव लोग शिव को पूजने वालों, खासकर संन्यासियों को अपने घर बुलाते और उन्हें जहरीला भोजन परोस देते थे। ऐसे में संन्यासियों ने खुद को बचाने का एक अनोखा तरीका अपनाया। काफी शिव भक्त आज भी इसी परंपरा का पालन करते हैं। अगर आप उन्हें भोजन देंगे, तो वे उस भोजन को आपके घर पर नहीं खाएंगे, बल्कि वे उसे किसी और जगह ले जाकर, पहले उसके ऊपर रुद्राक्ष रखकर यह जांचेंगे कि भोजन खाने लायक है या नहीं।

रुद्राक्ष नकारात्मक ऊर्जा के बचने के एक असरदार कवच की तरह काम करता है। कुछ लोग नकारात्मक शक्ति का इस्तेमाल करके दूसरों को नुकसान पहुंचाते हैं। यह अपने आप में एक अलग विज्ञान है। अथर्व वेद में इसके बारे में विस्तार से बताया गया है कि कैसे ऊर्जा को अपने फायदे और दूसरों के अहित के लिए प्रयोग में लाया जा सकता है। अगर कोई इंसान इस विद्या में महारत हासिल कर ले, तो वह अपनी शक्ति के प्रयोग से दूसरों को किसी भी हद तक नुकसान पहुंचा सकता है, यहां तक कि दूसरे की मृत्यु भी हो सकती है। इन सभी स्थितियों में रुद्राक्ष कवच की तरह कारगर हो सकता है।

Rudraksha Beads

Rudraksha Mala (108 Beads)

Rudraksha Necklace

Rudraksh Pendants

Rudraksha Kavach

Rudraksh Bracelets

Rudraksh Rings

Parad

Parad Shivlinga

Parad Idols

Parad Shri Yantra

Parad Lakshmi

Parad Hanuman

Parad Laxmi Choki

Parad Ganesha

Parad Pyramid

Parad Malas

Shaligrams-शालिग्राम

शालिग्राम का महत्व-शालिग्राम को भगवान विष्णु का ही एक अवतार माना जाता है। इसमें भगवान विष्णु के दस अवतार समाहित हैं। पुराणों के अनुसार जिस घर में शालिग्राम स्थापित हो, वह घर समस्त तीर्थों से भी श्रेष्ठ माना जाता है। शालिग्राम को विभिन्न पूजाओं को शामिल किया जाता है। खासतौर से सत्यनारायण की कथा में भगवान विष्णु के समीप शालिग्राम को स्थापित किया जाता है।

यह आमतौर पर काला और लाल रंग का होता है, जो गंडक नदी के किनारे ही पाया जाता है। भगवान विष्णु के शालिग्राम में परिवर्तित होने की दो कथाएं हैं

एक बार मां लक्ष्मी और सरस्वती के बीच लड़ाई हो गई और गुस्से में माता सरस्वती ने लक्ष्मी को श्राप दिया कि तुम धरती का एक पौधा बन जाओ। मां लक्ष्मी स्वर्ग से पृथ्वी पर तुलसी के पौधे के रूप में विराजमान हो गई। मां लक्ष्मी को स्वर्ग में ले जाने के लिए भगवान विष्णु गंडक नदी में उनका इंतजार कर रहे थे, उस नदी के कुछ शिला पर भगवान विष्णु की दशावतारों के छाप पड़ गए और वे पत्थर शालिग्राम के नाम से प्रसिद्ध हुए।

शालिग्राम की दूसरी कथा

जालंधर नामक एक दैत्य ने तीनों लोको में हाहाकार मचा रखा था। उसकी पत्नी का नाम वृंदा था, जो भगवान विष्णु की परम भक्त थी। जब जलंधर स्वर्ग में देवताओं परआक्रमण के लिए जा रहा था तो वृंदा ने पति की विजय के लिए एक अनुष्ठान रखा। इस अनुष्ठान के कारण देवता जालंधर को पराजित करने में असमर्थ थे वे भगवान विष्णु के पास गए। भगवान विष्णु जालंधर के वेश में वृंदा के पास गए उन्हें अपने द्वार में देख वृंदा पूजा अनुष्ठान छोड़ उनके पास आई। जैसे ही वृंदा का अनुष्ठान टूटा देवताओं ने जालंधर का सिर काट दिया। जालंधर का कटा सिर वृंदा के समीप आकर गिरा।

पति के कटे सिर को देख वृंदा ने द्वार पर खड़े व्यक्ति के बारे में जानना चाहा, तभी भगवान विष्णु अपने वास्त्विक रूप में आ गए। वृंदा समझ गई कि भगवान विष्णु ने उसके साथ छल किया है। अतः उसने भगवान विष्णु को पत्थर होने का श्राप दे दिया। भगवान विष्णु को पत्थर में परिवर्तित देख मां लक्ष्मी रोने लगीं और वृंदा से उसके श्राप को वापस लेने का निवेदन करने लगी। तब वृंदा ने मां लक्ष्मी के कहने पर अपना श्राप वापस ले लिया तथा पति के संग उसने प्राण त्याग दिए। वृंदा के शरीर के राख से एक पौधा निकला जिसका नाम भगवान विष्णु ने तुलसी रखते हुए कहा कि आज से मेरा एक रूप इस पत्थर शालिग्राम के रूप में रहेगा, जो तुलसी के साथ पूजा जाएगा। मैं तुलसी के बिना प्रसाद स्वीकार नही करूंगा।

पूजन का शुभ फल

स्कन्द पुराण के अनुसार शालिग्राम और तुलसी की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। प्रतिवर्ष कार्तिक मास की द्वादशी को तुलशी और शालिग्राम की पूजा की जाती है। इस पूजा का फल व्यक्ति के समस्त जीवन में पुण्यों और दान के फल के बराबर होता है।

Sarvottam Kalp Vriksha Lakshmi Shaligram

Lakshmi Keshav ( Janardhan ) Shaligram

Damodar Shaligram

Kalpvriksh Laxmi Narayan Shaligram

Sarvottam Hayagriva Shaligram

Adbhut Surya Narayan Shaligram

Lakshmi Kalki Dev Shaligram