वास्तुशास्त्र

जीवन मंत्र डेस्क. वास्तु शास्त्र पैसा और संपत्ति बढ़ाने के कुछ टिप्स बताए गए हैं। इनके अनुसार घर में बदलाव करने से कुबेर और लक्ष्मी जी प्रसन्न होते हैं। जिससे समृद्धि बढ़ती है। वास्तु के अनुसारउत्तरकुबेर की दिशा होती है। इस दिशा को साफ रखने से धन लाभ होता है। वहीं घर के पूर्व-उत्तर कोने में अन्य देवी-देवताओं की शक्ति होती है। इसे ईशान कोण भी कहा जाता है। इन दो दिशाओं में अगर कोई दोष न हो तो घर में पैसा आता है और वहां रहने वालों को संपत्ति लाभ भी होता है।

वास्तु के अनुसार ध्यान रखें ये बातें-

1.  घर की उत्तर दिशा की दिवारों का रंग नीला होना चाहिए।

2.  पानी का स्थान उत्तर दिशा में होना चाहिए।

3.  पानी की टंकी में शंख, चांदी का सिक्का या चांदी का कछुआ रखें।

4.  सजावटी सामानों में एक्वेरियम को घर की उत्तर दिशा में रखना चाहिए।

5.  कुबेर की दिशा होने के कारण उत्तर में तिजोरी रखनी चाहिए।

6.  उत्तर दिशा में नीले रंग का पिरामिड रखने से संपत्ति लाभ होता है।

7.  उत्तर दिशा में कांच का बड़ा बाउल रखें और उसमें चांदी के सिक्के डाल दें।

8.  पूर्व-उत्तर कोने में गणेश और लक्ष्मीजी की मूर्ति रखकर पूजा करें।

9.  घर के पूर्व-उत्तर कोने में गंदगी न रखें।

10.  उत्तर दिशा में आंवले का पेड़ या तुलसी का पौधा लगाएं।

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वास्तुशास्त्र के अनुसार घर के अंदर सूर्य की किरणें आनी चाहिए। घर के ज्यादातर हिस्से में सूर्य की रोशनी होने से उस जगह के कई दोष खत्म हो जाते हैं। संपूर्ण ब्रह्मांड का आधार सूर्य है। सूर्य उर्जा और रचनात्मकता का कारक ग्रह है। सूर्य की ऊर्जा से ही पृथ्वी पर जीवन है। पंचतत्वों में से एक सूर्य का वास्तु शास्त्र में भी बहुत महत्व है। सूर्यदेव को अग्नि का स्वरूप माना गया है, अत: वास्तु शास्त्र में सूर्य का विशेष महत्व माना जाता है।

वास्तु शास्त्र में माना जाता है सूर्य का विशेष महत्व

अंधेरे कमरे में या जहां सूर्य की रोशनी नहीं आती है, उस घर में कीड़े-मकोड़े व सीलन अधिक रहेगी। वहां पर रहने वाले व्यक्तियों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ेगा। यदि सूर्य का प्रकाश घर में आता है तो उसमें रहने वाले ऊर्जावान महसूस करेंगे। ज्योतिष में सूर्य को आत्मा कारक ग्रह कहा गया है। सूर्य की रोशनी जिस घर में पड़ती है वहां के लोगों का आत्मविश्वास भी बढ़ जाता है।

कमरे में आ रही सूरज की रोशनी देती है लाभ

घर के जिन कमरों में सूर्य की रोशनी आती है, घर के उन हिस्सों में ऊर्जा ज्यादा होती है। सूर्य की रोशनी के कारण घर की नकारात्मकता खत्म हो जाती है। जिस घर में सूर्य का प्रकाश नहीं जाता, वहां रहने वाले लोगों की सेहत अक्सर खराब ही रहती है। अंधेरे कमरे में या जहां सूर्य की रोशनी नहीं आती है, वहां रहने वाले लोगों का

आत्मविश्वास कम रहता है। ऐसे लोगों की जीवन शक्ति भी कम हो जाती है। रसोईघर एवं स्नानघर में भी सूर्य का प्रकाश पहुंचे ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए। घर में कृत्रिम रोशनी का उपयोग कम से कम रखना चाहिए।

शयन कक्ष में हो धीमी लाइट

शयन कक्ष में सदैव धीमा लाइट होनी चाहिए। शयनकक्ष में तेज रोशनी होगी तो हमारे आराम में बाधा डालेगी और नींद नहीं आएगी। शयनकक्ष या आरामकक्ष में हमारे सन्मुख लाइट नहीं होना चाहिए। पढ़ाई का कमरा यदि अलग है तो पढ़ते वक्त आंखों पर तेज रोशनी नहीं होना चाहिए, नहीं तो हमें पढ़ने में बाधा पहुंचेगी और नींद आने लगेगी।

Vastu Shastra

बढ़ता है दोष, माता लक्ष्मी की कृपा पाघर का वास्तु हमारे जीवन पर बड़ा गहरा प्रभव ड़ालता है। कई बार वास्तु में छोटी-छोटी गलतियों की वजह से माता लक्ष्मी की कृपा नहीं हो पाती। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में कई बार कुछ ऐसी चीजें होती हैं जिसकी हम अनदेखी कर देते हैं लेकिन यही अनदेखी नुकसान और परेशानी की वजह बन जाती है। वास्तु शास्त्र में घर पर मकड़ी के जाले को अशुभ माना जाता है इसलिए मकड़ी का जाला घर में न लगने दें। टूटे हुए आईने से हमेशा नकारात्मक ऊर्जा निकलती रहती है इसलिए घर में जब भी कोई दर्पण या शीशा टूट जाए तो उसे घर से बाहर कर दें।

घर में चमगादड़ का प्रवेश अशुभ माना गया है। वास्तु विज्ञान के अनुसार घर में चमगादड़ का आना सूनेपन की निशानी है। घर में कुछ बुरी घटनाएं होने के संकेत होते हैं।
घर की दीवारों में दरारों का होना अशुभ होता है इसलिए जहां दरार हो उसकी मरम्मत करवाएं, दरार का होना धन के लिए अशुभ माना गया है ।
नल से पानी टपकते रहने को अशुभ माना गया है। नल से लगातार पानी टपकने से धन की हानि होती है। इसलिए जब भी नल से पानी टपकता हो तो उसे ठीक करा लें।
घर की छत पर कबाड़ और बेकार की चीजों को एकत्र न होने दें। पूजा घर या घर पर कभी भी में बासी फूल को इकट्ठा करके नहीं रखें। घर में खराब पड़े बिजली के उपकरणों को नहीं रहने देना चाहिए। घर में कबूतर का घोंसला बनाना वास्तु विज्ञान के अनुसार अशुभ चिन्ह है। माना जाता है इससे घर पर बड़ी मुसीबत आती है।

Bedroom-बेडरूम

बेडरूम हमारे घर का बहुत ही खास हिस्सा होता है। ये घर का वो हिस्सा है, जहां हम सबसे ज्यादा रिलेक्स फील करते हैं। हमारे जीवन का अधिकांश समय भी बेडरूम में ही गुजरता है, क्योंकि यहीं हम सोते या आराम करते हैं। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रफुल्ल भट्ट के अनुसार, वास्तु में न सिर्फ सुख-समृद्धि के बल्कि सुखी वैवाहिक जीवन के भी सूत्र छिपे हैं। वैवाहिक जीवन में खुशियां बनी रहे, इसके लिए भी बेडरूम काफी खास होता है। यदि बेडरूम में नीचे लिखे वास्तु नियमों का पालन किया जाए तो वैवाहिक जीवन कहीं अधिक सुखमय हो सकता है।

बेडरूम में ड्रेसिंग टेबल कभी भी खिड़की के सामने न रखें, क्योंकि खिड़की से आने वाली लाइट परावर्तित होने से आपको परेशानी होगी। पलंग के सामने आईना नहीं होना चाहिए। अगर पलंग के सामने आईना होगा तो आप हमेशा व्याकुल व परेशान रहेंगे।
बेडरूम में फर्नीचर धनुषाकार, अर्धचंद्राकार या वृत्ताकार नहीं होना चाहिए। इससे घर के सदस्यों का स्वास्थ्य खराब रहता है।
बेडरूम में लाईट ऐसी हो कि पलंग पर सीधा प्रकाश न पड़े। प्रकार हमेशा पीछे या बाईं ओर से आना चाहिए।
बेडरूम में खिड़की जरूर होनी चाहिए। सुबह की किरणें बेडरूम में आने से हेल्थ अच्छी रहती है। बेडरूम में पैर दरवाजे की ओर करके न सोएं।
पलंग बेडरूम के दरवाजे के एकदम नजदीक नहीं होना चाहिए। यदि ऐसा होगा तो मन में अशांति व व्याकुलता बनी रहेगी।

Office-ऑफिस

वास्तु शास्त्र के अनुसार यदि ऑफिस में वास्तु दोष हो तो उसका असर कर्मचारियों के मनो-मस्तिष्क पर तथा उनकी सेहत पर भी पड़ सकता है। यहां तक कि ऑफिस में वास्तु दोष होने से कंपनी को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। ऑफिस के वास्तु दोषों को नीचे लिखे उपायों से दूर किया जा सकता है- ऑफिस में बॉस का केबिन सबसे पहले नहीं होना चाहिए। प्रवेश द्वार के समीप किसी ऐसे सहायक का कक्ष हो जो आने वालों को जानकारी उपलब्ध करवा सके। दरवाजे की सीध में किसी कर्मचारी को न बैठाएं। ऑफिस में हरे या गहरे रंग का प्रयोग नहीं करना चाहिए। सफेद, क्रीम या पीला जैसे हल्के रंग का उपयोग करना चाहिए।

ऑफिस में पानी की व्यवस्था ईशान कोण में करनी चाहिए। ईशान में पानी तब ही शुभ होगा, जब उसका संबंध जमीन से हो। यदि धरातल से ऊंचे स्थान पर पानी रखना हो तो अपनी सुविधानुसार किसी भी स्थान पर रख सकते हैं। कुबेर का वास उत्तर दिशा में माना गया है। इसलिए जहां तक संभव हो कैशियर को उत्तर दिशा में ही बैठाएं।

कम्प्यूटर, कंट्रोल पैनल, विद्युत उपकरण आदि कार्यालय के आग्नेय कोण में ही लगाए जाने चाहिए। यदि ऑफिस में वेटिंग रूम बनवाएं तो वायव्य कोण उचित रहेगा। कान्फ्रेंस/मीटिंग हॉल भी वायव्य कोण में शुभ माना गया है। एक टेबल पर एक से अधिक कर्मचारियों को नहीं बैठाना चाहिए। इससे काम प्रभावित होता है। ऑफिस के बड़े अधिकारियों को दक्षिण में व छोड़े अधिकारियों को पश्चिम में बैठाना चाहिए।

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वास्तुशास्त्र

भारत की प्राचीन विद्या वास्तुशास्त्र, जिस पर सदियों से लोगों का विश्वास कायम है, की स्वीकार्यता आज भी बरकरार है। वे लोग जो वास्तुशास्त्र के अनुसार ही अपना जीवन व्यतीत करते हैं वे अपने घर, मकान या फिर अन्य व्यवसायिक जगहों की छोटी-बड़ी संरचना वास्तु के निर्देशों पर आधारित रहकर ही करवाते हैं।

वास्तुशास्त्र के अनुकूल

विशेषकर निवास स्थान की बात करें तो यहां से व्यक्ति का निजी जीवन जुड़ा होता है और अगर निजी जीवन में सुख शांति है तो वह आपके संपूर्ण व्यक्तित्व पर झलकता है। यही वजह है कि अधिकांश लोग अपने निवास स्थान की हर दिशा का निर्धारण वास्तुशास्त्र के अनुकूल ही करते हैं।

निवास स्थान

वास्तुशास्त्र के अनुसार यह माना जाता है कि घर का प्रवेश द्वार अगर उत्तर दिशा में हो तो यह बहुत उत्तम होता है। अगर किसी को यह च्वॉयस दी जाए कि वह उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम में से कौन सी दिशा का घर खरीदना पसंद करेंगे तो जाहिर तौर पर वह उत्तर दिशा के निवास स्थान को ही चयनित करेंगे। लेकिन क्या सभी उत्तर दिशा के निवास स्थान रहने के लिए उत्तम स्थान होते हैं?

उत्तर दिशा का मकान

इसका जवाब कुछ हद तक हां भी है और कुछ तक ना भी, क्योंकि भले ही वास्तु के अनुसार उत्तर दिशा को सबसे शुभ दिशा माना गया है लेकिन अगर घर के प्रवेश द्वार का निर्धारण वास्तु के निर्देशों के अनुसार ना किया जाए तो उत्तर दिशा का घर भी अशुभ फल प्रदान कर सकता है।

घर का प्रवेश द्वार

वास्तुशास्त्र के अनुसार घर के प्रवेश द्वार की दिशा ही घर की सुख-शांति और पारिवारिक जनों के बीच प्रेम की गारंटी नहीं बन सकती। इसके बहुत से अन्य पैमाने भी हैं। वास्तुशास्त्र के अनुसार उत्तर दिशा के किसी भी कोने में आप घर का मुख्य प्रवेश द्वार बनवा सकते हैं लेकिन इसके साथ कुछ शर्तें भी जुड़ी हैं।

उत्तर-पूर्वी कोना

पहली शर्त यह है कि घर के उत्तर-पूर्वी कोने में कभी भी शौचालय, रसोईघर या फिर बेडरूम नहीं होना चाहिए।

उत्तर दिशा का मकान

उत्तर दिशा के प्रवेश द्वार वाले मकान के भीतर कैसी संरचना या नक्शा हानिकारक सिद्ध हो सकता है, यह तो हमने आपको बता दिया। अब हम आपको ये बता देते हैं कि अगर आपका निवास स्थान भी उत्तरमुखी है तो आपको किन नियमों को जरूर लागू करना चाहिए।

Dustbin-कूड़ेदान

घर के उत्तरी कोने में बड़े-बड़े पेड़ या घने पौधे भी नहीं लगाने चाहिए। इस दिशा में कूड़ेदान रखना या फिर कूड़ा इकट्ठा करना भी वास्तु के अनुसार सही नहीं है। पानी की टंकी को रखने के लिए घर का उत्तरी कोना सही स्थान नहीं है।

सीढ़ियों का निर्माण

घर के उत्तरी कोने में सीढ़ियों का निर्माण नहीं करवाना चाहिए। साथ ही घर का कोई भी कोना जो उत्तर दिशा से मेल रखता हो, वहां भी सीढ़ियां नहीं होनी चाहिए।

वास्तुशास्त्र के पड़ाव

वास्तुशास्त्र के अनुसार कुछ पद या पड़ाव निर्धारित किए गए हैं। इस तस्वीर में वे पद आपको स्पष्ट दिखाई भी देंगे और समझ भी आएंगे। उत्तर दिशा में प्रवेश द्वार वो भी पांचवें पद के सामने होना घर को धन-संपन्नता से भर देता है। पांचवां पद बहुत छोटा है इसलिए आप 1-5 तक का स्थान प्रवेश द्वार के लिए रख सकते हैं।

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घर की दीवारें

घर के उत्तर और पूर्वी भाग में बनाई जानी वाली दीवारें, दक्षिण और पश्चिमी भाग की अपेक्षा छोटी और पतली होनी चाहिए।

रसोईघर

इस बात को लेकर जरूर आश्वस्त रहें कि घर में भीतर रसोईघर या तो दक्षिण-पूर्वी दिशा में हो या फिर उत्तर-पश्चिमी दिशा में।

खाना बनाने की दिशा

जब आप दक्षिण-पूर्वी दिशा में स्थित खाना बना रहे हों तो आपका मुख पूर्वी दिशा में होना चाहिए और जब आप उत्तर-पश्चिमी दिशा वाली किचन में खाना पका रहे हों तो आपका मुख पश्चिमी दिशा में होना चाहिए।

Temple-मंदिर

घर का मंदिर हमेशा उत्तर-पूर्वी कोने में ही स्थित होना चाहिए। इसके अलावा बैठक भी इस दिशा में होगी तो शुभ रहेगा।

मास्टर बेडरूम

घर का मास्टर बेडरूम दक्षिण-पश्चिमी दिशा में ही स्थित होना चाहिए।

क्या है बुराई

व्यक्तिगत जीवन में खुशहाली और संपन्नता का विशेष महत्व है। अगर वास्तुशास्त्र के नियमों की सहायता से ये सब हासिल किया जा सकता है तो इसमें बुरा भी क्या ॥